Systematic Investment Plan in Hindi, SIP क्या है?

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SIP यानि Systematic Investment Plan हिंदी में कहेंगे व्यवस्थित निवेश योजना. मगर मैं इसे क्रमबद्ध निवेश योजना कहना चाहूँगा. SIP में एक बराबर समय के अंतराल में, एक बराबर राशि एक ही मद में निवेश की जाती है. मान लीजिये की एक निवेशक के पास पचास हजार रुपये है निवेश करने के लिए तो वह इन्हें एक ही दिन निवेश ना करके SIP में पांच हजार प्रति माह के हिसाब से दस माह तक निवेश करते हैं.

कोई भी निवेशक SIP के द्वारा शेयर बाजार Share Market, म्यूचुअल फण्ड Mutual Fund अथवा Gold ETF में निवेश कर सकता हैं. निवेश का अंतराल प्रति दिन, प्रति सप्ताह अथवा प्रति माह रखा जा सकता है. सैलरी पेशा लोगों के लिये यह निवेश का एक आसान उपाय है. हर माह अपनी सैलरी से कुछ बचत करके नियमित और अनुशासित ढंग से बड़ा निवेश किया जा सकता है. किसी भी म्युचुअल फण्ड में एडवांस चैक दे कर अथवा ऑनलाइन निर्देश दे कर SIP शुरू किया जा सकता है. SIP रु 500 प्रति माह जैसी छोटी राशि से भी करवाया जा सकता है.

जिन्हें शेयर बाजार Share Market के विषय में अधिक जानकारी नहीं है उनके लिए SIP के द्वारा निवेश करना ही बेहतर तरीका है जिससे निवेशक का जोखिम कम हो जाता है. SIP  निवेश एवं बचत की ऐसी पद्धति है जिसके अंतर्गत कोई भी निवेशक एक निश्चित अंतराल में एक निश्चित राशि अपने निर्धारित शेयर Shares अथवा म्यूचुअल फण्ड Mutual Fund में निवेश करता रहता है. Gold यानि सोने जैसी कमोडिटी में भी SIP द्वारा निवेश किया जाता है. SIP द्वारा निवेश करने से अनुशासित तरीके से निवेश करना आसान हो जाता है तथा निवेश का जोखिम भी कम हो जाता है.

आपने प्यासे कौवे की कहानी तो सुनी होगी. जिसके घड़े में पानी कम था और उसने छोटे छोटे पत्थर डाल कर घड़ा भर दिया और पानी पी लिया.

 SIP यानि Systematic Investment Plan हिंदी में कहेंगे व्यवस्थित निवेश योजना. मगर मैं इसे क्रमबद्ध निवेश योजना कहना चाहूँगा. SIP में एक बराबर समय के अंतराल में, एक बराबर राशि एक ही मद में निवेश की जाती है. मान लीजिये की एक निवेशक के पास पचास हजार रुपये है निवेश करने के लिए तो वह इन्हें एक ही दिन निवेश ना करके SIP में पांच हजार प्रति माह के हिसाब से दस माह तक निवेश करते हैं.

कोई भी निवेशक SIP के द्वारा शेयर बाजार Share Market, म्यूचुअल फण्ड Mutual Fund अथवा Gold ETF में निवेश कर सकता हैं. निवेश का अंतराल प्रति दिन, प्रति सप्ताह अथवा प्रति माह रखा जा सकता है. सैलरी पेशा लोगों के लिये यह निवेश का एक आसान उपाय है. हर माह अपनी सैलरी से कुछ बचत करके नियमित और अनुशासित ढंग से बड़ा निवेश किया जा सकता है. किसी भी म्युचुअल फण्ड में एडवांस चैक दे कर अथवा ऑनलाइन निर्देश दे कर SIP शुरू किया जा सकता है. SIP रु 500 प्रति माह जैसी छोटी राशि से भी करवाया जा सकता है.

SIP निवेश का एक बेहतरीन तरिका है. यहाँ हम SIP निवेश के फायदे बता रहे हैं:
छोटा निवेश छोटी राशि निवेश के लिए निकालना आसान होता है. लम्बे समय तक छोटी छोटी राशि का निवेश आपको बड़े रिटर्न दे सकता है.
रिस्क में कमी SIP का सबसे बड़ा फायदा यही है. मान लीजिये किसी निवेशक के पास पचास हजार रुपये शेयर मार्किट में निवेश के लिए हैं. उसने इन्हें बाजार में एक साथ लगा दिया. अगले दिन बाजार ऊपर जाएगा अथवा नीचे कोई नहीं जानता. यही निवेश यदि थोड़े थोड़े अंतराल में बाँट कर किया जाए तो रिस्क में कमी आ जाती है.
निवेश में आसानी SIP में निवेश ऑनलाइन निर्देश दे कर किया जा सकता है. निश्चित तारीख को म्यूचुअल फण्ड आपके खाते से निशचित राशि लेकर आपके चुने हुए प्लान में निवेश कर देता है.

आपको एक किस्सा सुनाते हैं- रमेश और राजेश दो दोस्त हैं. दोनों ने अपनी अपनी पत्नियों को वादा किया कि अगली शादी की सालगिरह पर सोने का हार ले कर देंगे. रमेश पूरे साल इंतज़ार करते रहे कि जब सोना सस्ता होगा तब लेंगे. कई बार सोना सस्ता भी हुआ मगर रमेश को लगाता कि सोना अभी और सस्ता होगा. रमेश हार नहीं ले पाए और साल गिरह पर जो कीमत थी उसी पर हार लेनी पड़ा. राजेश ने पहले महीने से ही गोल्ड ETF में SIP निवेश शुरू कर दिया. जब जब सोने की कीमत कम हुई राजेश का निवेश हो जाता था. आप अंदाज लगा सकते हैं की हार की कीमत किसने ज्यादा ज्यादा दी होगी.
अंत में आपने प्यासे कौवे की कहानी तो सुनी होगी. जिसके घड़े में पानी कम था और उसने छोटे छोटे पत्थर डाल कर घड़ा भर दिया और पानी पी लिया.

SIP मुख्य रूप से शेयर मार्किट Share Market में छोटी छोटी राशि को नियमित रूप से अनुशाशन के साथ म्यूचुअल फण्ड Mutual Fund द्वारा निवेश करने का आसान तरिका है.

व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) से सम्बंधित पूछे जाने वाले कुछ आवश्यक प्रश्न-उत्तर –

प्रश्न – एसआईपी (SIP) का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर – व्यवस्थित निवेश योजना

प्रश्न – व्यवस्थित निवेश (एसआईपी ) योजना क्या है?
उत्तर – एसआईपी एक ऐसी स्कीम है. जिसके माध्यम से आप म्युचुअल फंड में निवेश कर लंबे समय में एक अच्छा रीटर्न प्राप्त कर सके है.

प्रश्न – एसआईपी में न्यूनतम व् अधिकतम कितना निवेश कर सकते है ?
उत्तर – एसआईपी में न्यूनतम 500 रूपए जमा कर सकते है. तथा एसआईपी में निवेश करने की कोई अधिकतम सीमा नही है.

प्रश्न – एसआईपी समय से पहले बन्द करने पर किसी प्रकार का जुर्माना हो सकता है या नहीं ?
उत्तर – एसआईपी समय से पहले बन्द करने पर किसी प्रकार का जुर्माना नही पड़ता.

प्रश्न – क्या म्यूचुअल फंड कंपनियां एसआईपी की सुविधा के लिए अतिरिक्त राशि चार्ज करते हैं?
उत्तर – नही, म्यूचुअल फंड कंपनियां एसआईपी के लिए कोई अतिरिक्त राशि चार्ज नही करती है.

प्रश्न – एसआईपी क़िस्त का भुगतान ना करने पर क्या हो सकता है?
उत्तर – यदि आप एक माह में निवेश नही करते है. तो म्यूचुअल फंड कंपनी अगले माह आपके निवेश करने का इन्तजार करेगी. यदि 2 महीने तक आप तय की गयी निश्चित राशि निवेश (Invest) नही करते तो आपका एसआईपी अकाउंट बंद कर दिया जायेगा.

प्रश्न – क्या कोई व्यक्ति एसआईपी खाते में एकमुश्त राशि (lump sum amount) जमा कर सकता हैं ?
उत्तर – हाँ, आप एक ही म्यूचुअल फंड फोलियो में एकमुश्त राशि का निवेश कर सकते हैं। हालाँकि, एक म्यूचुअल फंड में हर एसआईपी किस्त एक अलग निवेश है।

प्रश्न – एसआईपी शुरू करने के लिए उचित समय क्या है?
उत्तर – यदि आप लंबी अवधि के लिए एसआईपी करवाना चाहते है. तो आप कभी भी एसआईपी शुरू कर सकते है.एसआईपी खुद ही शेयर बाजार की अस्थिरता को कम करता है.

प्रश्न – क्या एसआईपी ऑनलाइन खोली जा सकती है?
उत्तर – आप म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट या ऑनलाइन डिस्ट्रीब्यूटर पोर्टल के माध्यम से एसआईपी ऑनलाइन खोल सकते हैं।

पाना चाहते हैं आप अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न, तो सिप को न करें मार्केट से लिंक

सिस्‍टेमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (सिप) निवेश का एक सरल आइडिया है, यदि आप इसे जटिल बनाते हैं, तो वास्‍तव में आप अपने रिटर्न को खराब करेंगे। सिप के लिए कई भ्रांतियां हैं। सिप को अभी भी लोग पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं और वे इसका गलत इस्‍तेमाल कर रहे हैं। कई निवेशक सिप के जरिये किए जाने वाले निवेश को शेयर बाजार से लिंक करते हैं। जो कि बिल्‍कुल भी सही नहीं है।

सामान्‍य तौर पर जो लोग निवेश के लिए सिप का रास्‍ता अपनाते हैं लेकिन वे इसे बाजार के समय के साथ जोड़ देते हैं। हम 2010 में जाते हैं, मुझे याद है कि निवेशकों ने दावा किया था कि सिप अच्‍छा नहीं है और उस समय वह इससे बाहर निकल गए थे। यह वह लोग थे जिन्‍होंने 2008 की भारी गिरावट के बाद अपने सिप को बंद कर दिया था और इसे दोबारा 2009 की रिकवरी के बाद शुरू किया था।

लांग टर्म में संपत्ति बनाने के लिए अनुशासन में रहकर सिप में निवेश करते रहना होगा। चूंकि इक्विटी मार्केट में शॉर्ट और मीडियम टर्म में काफी उतार-चढ़ाव आते हैं, ऐसे में लगातार निवेश करते रहना बहुत अहम है। इसमें निवेशक कम रकम में ज्यादा और ज्यादा रकम में कम यूनिट्स खरीदता है, जो कि निवेशक के लिए फायदेमंद रहता है। सिप को अपने किसी भी वित्तीय लक्ष्य जैसे बच्चे की शादी, रिटायरमेंट फंड के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।

आमतौर पर निवेशकों को सिप की सही अहमियत की ज्यादा समझ नहीं होती। सिप के पीछे सोच दरअसल शॉर्ट टर्म में बाजार के उतार-चढ़ाव की अनदेखी करने की है, लेकिन वास्तविक जीवन में इस पर अमल करना बहुत मुश्किल है। निवेशक सामान्यत: अपने निर्णय शॉर्ट टर्म में सिप से मिले रिटर्न के आधार पर करते हैं। यदि पिछले एक वर्ष में रिटर्न अच्छे मिले हैं तो वे सिप की रकम बढ़ाने लगते हैं और इसके उलट यदि रिटर्न खराब रहे हैं तो वे सिप खाता ही बंद कर देते हैं। हकीकत में ये दोनों ही गलत हैं। बाजार की तेजी के दौर में अच्छे रिटर्न के लिए सिप में इजाफा करने का सीधा अर्थ है कि वह महंगे दाम पर ज्यादा यूनिट्स खरीद रहा है, वहीं इसके उलट जब बाजार कमजोर होता है और शॉर्ट टर्म में सिप से निगेटिव रिटर्न मिलते हैं तो निवेशक आमतौर पर सिप बंद कर देते हैं, जबकि सिप का वास्तविक लाभ तब मिलता है जब सस्ते दाम पर ज्यादा यूनिट्स खरीदता है और निवेशक बाजार में रिकवरी का इंतजार करता है।

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