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जीएसटी ने निकाली पटाखों की हवा, महंगे हुए धमाके

मंदसौर।  दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी के धमाके इस बार कम सुनाई देंगे। इसका कारण है पटाखों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगना। थोक पटाखा व्यापारियों ने बताया कि पहले 14 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगता था, लेकिन अब 28 प्रतिशत जीएसटी लागू कर दिया है। इससे पटाखे महंगे होंगे, जिससे व्यापार पर असर पड़ेगा।

जीएसटी का असर बाजार के साथ ही पटाखा बाजार पर भी पड़ रहा है। सरकार ने पटाखों पर 12 फीसदी की जगह 28 फीसदी जीएसटी लगा दिया है। इधर फुटकर दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते पटाखों के दाम में 30 फीसदी तक वृद्घि हो गई है। पटाखे महंगे के बाद भी अस्थायी पटाखा बाजार में पिछले साल बने 234 लाइसेंस की जगह फुटकर व्यापारियों ने 164 लाइसेंस ही बनवाए हैं। यही नहीं एक थोक व्यापारी ने भी पटाखों का व्यवसाय बंद कर दिया है। जिले में हर साल 8 करोड़ का पटाखा व्यापार करीब 3 से साढ़े तीन करोड़ का ही रह गया है। व्यापारियों की मानें तो इस वर्ष पटाखा गरीब वर्ग की पहुंच से बाहर हो गया है।

देश के सबसे बड़े पर्व दीपावली पर भी जीएसटी का असर दिख रहा है। राजीव गांधी क्रीड़ा परिसर में अस्थायी पटाखा मार्केट की तैयारियां प्रारंभ हो गई है। केंद्र सरकार ने पटाखों पर 12 फीसदी टैक्स को बढ़ाते हुए जीएसटी के दायरे में लाकर 28 फीसदी कर दिया है। फुटकर व्यापारियों तक माल पहुंचते-पहुंचते यह वृद्घि 30 फीसदी तक हो रही है। इसका सीधा असर राजीव गांधी क्रीड़ा परिसर में लगने वाले अस्थायी पटाखा बाजार पर देखा जा रहा है। थोक में ही पटाखों के दाम बढ़ने व दुकान लगाने के लिए किए जाने वाले अन्य खर्च के बाद फूटकर व्यापारियों को अधिक लाभ नहीं दिख रहा है। इस वर्ष फुटकर दुकानों के लिए लाइसेंस में ही 30 फीसदी की कमी आई है। गत वर्ष पटाखा दुकानों के लिए व्यापारियों ने 234 लाइसेंस बनाए थे। इस वर्ष यह संख्या मात्र 164 ही रह गई है। यहीं नहीं इनमें भी करीब 125 दुकानें ही लगने की उम्मीद है। अस्थायी बाजार के लिए गुरुवार को मैदान पर लाइनिंग का कार्य भी प्रारंभ किया गया।

थोक व्यापारी ने भी बंद की दुकान

फुटकर के साथ थोक बाजार में भी इसका असर देखा गया है। शहर के तीन बड़े थोक व्यापारियों में से एक बड़े थोक व्यापारी ने इस वर्ष पटाखों का व्यवसाय बंद कर दिया। शंकर स्टोर्स के कन्हैयालाल बाबानी ने बताया कि पटाखा बाजार में वह लाभ नहीं बचा है। हर साल पटाखे महंगे होते जा रहे हैं वे लोग इतनी राशि देने को तैयार नहीं है। अधिकारियों द्वारा भी आए दिन यह स्टॉक और अन्य कागजों को लेकर परेशान किया जाता है। ऐसे में व्यापार बंद करना ही उचित समझा।

थोक बाजार में आधा रह गया

पटाखे में 30 फीसदी तक वृद्घि होने कारण इसका असर थोक बाजार पर भी दिखाई दिया। थोक व्यापारियों की मानें तो जिले में हर साल करीब 8 करोड़ से अधिक का व्यवसाय होता है, जो इस साल घटकर तीन से साढ़े तीन करोड़ का ही रह गया है।

गरीबों की पहुंच से बाहर हुए पटाखे

इस वर्ष बाजार में 70-80 रुपए में बिकने वाला अनार के पैकेट के दाम 100-110 रुपए, 90 रुपए के सुतली बम के दाम 120 रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में दीपावली पर फुलझड़ी, अनार, चकरी व बम के एक-एक पैकेट के लिए भी लोगों को 400-500 रुपए देना होंगे।

 

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