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मन्‍दसौर के इस मंदिर में 2042 तक चोला चढ़ाने के लिए करना पड़ेगा इंतजार

मंदसौर। मालवा का दशपुर नगर जिसे मंदसौर नाम से जाना जाता हैं, इस नगर में श्री हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसे आस-पास सहित दूर-दूराज के क्षेत्रवासी तलाई वाले बालाजी के नाम से जानते है। प्राप्त जानकारी अनुसार यह प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी है एवं जिले में ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अद्वितीय है, जिसे तलई वाले बालाजी के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की यह मान्यता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। मंदिर को हनुमान जयंति पर विशेष रूप से सजाया गया है। सोमवार को रात्री 8.30 से बालाजी महाराज की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। वही आज प्रातः 4 बजे से बालाजी जन्मोत्सव यज्ञ प्रारंभ होगा। मंदिर परिसर में प्रातः 6 बजे बालाजी की प्रतिमा की भव्य महाआरती की जाऐगी। इसके उपरांत प्रसादी का वितरण किया जाऐगा। वही प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक श्री रूद्धमहायज्ञ की पूर्णाहुती होगी।

चोला चढ़ाने के लिए 2042 तक इंतजार
यहां पर भक्तो को चोला चढ़ाने के लिए कई वर्षो तक प्रतिक्षा करनी पड़ती है। अगर आप चोला चढ़ाने की सोच रहे है तो आपकी यह इच्छा 2042 के बाद ही पूरी हो सकेगी। वह भी उस स्थिति में जब आप आज यहां चोला चढ़ाने के लिए अपना नाम रजिस्ट्रेशन करवा लें। ऐसा नहीं होने पर यह प्रतीक्षा सूची और लंबी होती जाएगी और आपका नंबर इसके बाद ही आएगा। कम से कम हनुमानजी के प्रिय वार मंगलवार और शनिवार को लेकर तो यही स्थिति है। जहां मंगलवार को चोला चढाने की प्रतीक्षा के लिए अप्रेल 2042 तक एवं शनिवार को चोला चढ़ाने के लिए दिसंबर 2036 शनिवार तक इंतजार करना पड़ेगा।

तलाई वाले बालाजी मंदिर का इतिहास
श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी जो शूरता, वीरता, दक्षता, बुद्धिमता आदि गुणों के पुंज है तथा जिनकी भक्ति करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं तथा समस्त मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती है इसलिये यहाँ के नर-नारी श्री बालाजी के रूप में श्री हनुमान जी को पूजते, सजाते एवं दुलारते हैं । इस मंदिर को तलाई वाले बालाजी के मंदिर से भी जाना जाता है ।
लगभग 800 वर्ष पुरानी बालाजी की प्रतिमा प्रारम्भ में विशाल वटवृक्ष के नीचे विराजित थी, यह स्थान शहर से दूर सूबा साहब (कलेक्टर) बंगले के पास स्थित था। मंदिर के पास ही एक तलाई थी जिस पर वर्तमान में नगरपालिका तरणताल स्थित हैं। किवंदती हैं कि इस प्रतिमा की स्थापना अत्यंत सिद्ध परमहंस संत द्वारा की गयी थी, बहुत समय तक यहाँ बनी धर्मशाला, तलाई एवं मंदिर साधु संतों एवं जमातों का विश्राम एवं आराधना स्थल रहा।
उपलब्ध प्रमाणों से ज्ञात होता हैं कि नगर की प्रमुख फर्म एकामोतीजी के श्री फूलचंद जी चिचानी, श्री बद्रीलालजी सोमानी, श्री नत्थूसिंह जी तोमर ने लम्बे समय तक अपनी सेवाएं दी। (अन्नत श्री विभूषित ब्रह्मलीन पूज्य राजारामदास जी महाराज अधिष्ठाता, श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर, भीलवाड़ा) ने भी 1940 ई. में यहाँ रहकर साधना की हैं।
सन् 1964 में बालाजी मंदिर न्यास के गठन के बाद मंदिर परिसर का योजनाबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा रहा हैं । 1995 के पश्चात् मंदिर के पुनर्निर्माण के कार्य के अंतर्गत 85 फीट ऊँचा शिखर तथा निज मंदिर का निर्माण लगभग पूणर्ता की ओर है, इसमें बालाजी के स्थानीय भक्तों के अतिरिक्त देश-विदेश में फैले भक्तों का सहयोग रहा हैं।
मंदिर के आस-पास का सारा इलाका बालागंज के नाम से ही जाना जाता हैं। बालागंज के सभी रहवासी भगवान को अपना परिजन ही मानते हैं और स्वयं को उनके अपने भी यहाँ के युवाओं के बल, बुद्धि, एवं प्रताप में बालाजी की फलक व्याप्त हैं और सारा नगर इसे मानता भी हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बालाजी मंदिर के पास होने के कारण संभवत: पूरे क्षेत्र का नाम बालागंज पढ़ा होगा।

मंदिर में प्रतिदिन श्री बालाजी को चोला चढ़ाया जाता है और त्योहारों पर विशेष चोला चढ़ाया जाता है।
चोला घोदान की राशि इस प्रकार है-
1. 1. सामान्य दिनों में श्री बालाजी को चोला चढ़ाने की राशि – 351/- रूपये
2. 2. मंगलवार और शनिवार को श्री बालाजी को चोला चढ़ाने की राशि – 501/-के रूप में
3. 3. श्री हनुम जयंती पर श्री बालाजी को चोला चढ़ाने की राशि – 2100/- रूपये
4. 4. शिवरात्रि, जन्ममस्तमी, रामनवमी और एकदशी को श्री बालाजी को चोला चढ़ाने की राशि – 1100/- रूपये
5. 5. राम संरक्षित स्त्रोत प्रतिदिन हवन राशि – 51/- रुपए

 

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