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चाणक्य अपने ग्रंथो में आखिर क्यों करते है “संसर्ग !! “के बाद स्नान की बात

वेदों में सुबह जल्दी स्नान करने को स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम माना गया है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली में सूर्य निकलने से पहले हर किसी के लिए स्नान करना सम्भव नहीं हो पाता। समय ने इस नियम में भी बदलाव कर दिया है। लेकिन फिर भी ऐसे कार्य है जिनके करने के बाद स्नान करना अनिवार्य है। आचार्य चाणक्य नीति के अनुसार ऐसे चार काम हैं, जिन्हें करने के बाद अच्छे स्वास्थ्य की दृष्टि से नहा लेना चाहिए। इससे न केवल आप स्वस्थ रहेंगे बल्कि आपकी आयु में वृद्धि और सौभाग्य भी मिलेगा।

स्त्री हो या पुरुष, शारीरिक संबंध बनाने के बाद नहाना आवश्यक है क्योंकि काम-क्रिया (सेक्स) के बाद स्त्री और पुरुष दोनों ही अपवित्र हो जाते हैं। अतः जब तक वे नहाएँगे नहीं तब तक किसी भी कार्य के लिए उपयुक्त नहीं माने जाएँगे।

चाणक्य के अनुसार संभोग के बाद सबसे पहले नहाना चाहिए। नहाने से पूर्व घर की साफ़ सफ़ाई भी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि ऐसा करके आप घर को और गंदा कर रहे होते हैं। चाणक्य के अनुसार निम्नलिखित अवसरों पर भी नहाना अनिवार्य है।

तेल मालिश के बाद
चाणक्य ने बताया है कि स्वस्थ शरीर और चमकदार त्वचा के लिए जरूरी है कि सप्ताह में कम से कम एक बार पूरे शरीर की तेल मालिश की जानी चाहिए। तेल मालिश के बाद शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और अंदर का मेल बाहर निकल जाता है। इसीलिए तेल मालिश के तुरंत बाद नहा लेना चाहिए। तेल मालिश के बाद बिना नहाए बाहर जाना अशुभ माना जाता है।

शारीरिक संबंध
संभोग के बाद किसी भी धार्मिक क्रिया में शामिल होना अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद स्नान अवश्य करें और स्नान करके ही अन्य किसी कार्य में शामिल हों।

मृतक शरीर को छूने के बाद
चाणक्य कहते है कि शवयात्रा या अंतिम संस्कार से लौटने के बाद व्यक्ति को घर में प्रवेश करने के पहले स्नान कर लेना चाहिए। मृत्यु के बाद मृतक के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। जिससे शरीर बैक्टीरिया उत्पन्न करने लगता है। यह बैक्टीरिया अन्य लोगों के शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं।

बाल कटवाने के बाद
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हजामत (बाल कटवाना) करवाने के बाद तुरंत स्नान कर लेना चाहिए। बाल कटवाने के बाद पूरे शरीर पर छोटे-छोटे बाल चिपक जाते हैं जो कि नहाने के बाद ही शरीर से साफ हो सकते हैं। हजामत क्रिया के बाद बिना नहाए कोई भी धार्मिक कर्म नहीं करना चाहिए।

ग्रहण के बाद
हिन्दू शास्त्रों के अंतर्गत स्नान के अलावा हाथ पैर धोना भी उपयुक्त माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भोजन ग्रहण करने के पहले और सूर्य और चंद्र ग्रहण के बाद नहा कर ही किसी धार्मिक काम को करना चाहिए।

शवयात्रा के बाद
यदि कोई व्यक्ति किसी मृत इंसान की अंतिम यात्रा में जाता है या शमशान जाता है तो वहां से आने के तुरंत बाद भी नहा लेना चाहिए। शास्त्रो के अनुसार अंतिम यात्रा में जाने के बाद लौटने पर हमारे शरीर को पवित्र करने के लिए स्नान अत्यन्त आवश्यक हो जाता है।

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